इतवाउत्तर प्रदेशकुशीनगरगोरखपुरबस्तीलखनऊसिद्धार्थनगर 

“नियमों को ठेंगा दिखा रहा पचपोखरी पावर हाउस: अपने ही गांव में ‘साहब’ की तैनाती, पारदर्शिता पर सवाल”

"पचपोखरी बिजली विभाग में 'अंधेर नगरी चौपट राजा': चहेते कर्मचारी के लिए ताक पर रखे विभागीय नियम"

अजीत मिश्रा (खोजी)

😇नियमों को ठेंगा दिखा रहा पचपोखरी पावर हाउस: ‘अपने’ गांव में ही साहब की तैनाती, विभाग मौन😇

⚡”बड़ा खुलासा: संतकबीरनगर के इस पावर हाउस में रसूख के आगे बौने हुए नियम, एसएसओ की तैनाती ने खोला विभाग का कच्चा चिट्ठा”

⚡”होम टाउन पोस्टिंग का ‘खेल’: पिपरा हसनपुर के निवासी योगेंद्र चौहान की पचपोखरी में तैनाती से ग्रामीणों में आक्रोश”

⚡”विभागीय नियमों की बलि: पचपोखरी पावर हाउस में एसएसओ की तैनाती पर उठे गंभीर सवाल”

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश

संतकबीरनगर। सरकारी नियम कागजों की शोभा बढ़ाने के लिए होते हैं या पालन करने के लिए? यह सवाल इन दिनों संतकबीरनगर के पचपोखरी बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को देखकर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ऊर्जा विभाग के उन स्पष्ट दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जो पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं।

💫क्या है पूरा मामला?

मामला पचपोखरी पावर हाउस में तैनात एसएसओ (SSO) योगेंद्र चौहान से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, योगेंद्र चौहान मूल रूप से पिपरा हसनपुर के निवासी हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पिपरा हसनपुर गांव इसी पचपोखरी पावर हाउस के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आता है। विभागीय नियमावली स्पष्ट रूप से कहती है कि किसी भी कर्मचारी या लाइनमैन की तैनाती उसके गृह ग्राम या उस फीडर/पावर हाउस में नहीं की जा सकती, जिससे उसके अपने गांव की बिजली आपूर्ति जुड़ी हो।

💫नियमों की बलि चढ़ा रही ‘मेहरबानी’

विभाग में यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि बिजली चोरी, अवैध कनेक्शन या लाइन लॉस जैसे मामलों में कोई कर्मचारी अपने रसूख या संबंधों का बेजा इस्तेमाल न कर सके। लेकिन पचपोखरी में नियमों को ताक पर रखकर योगेंद्र चौहान की तैनाती कई सवाल खड़े कर रही है:

🔔क्या उच्चाधिकारियों को इस ‘होम टाउन’ पोस्टिंग की जानकारी नहीं है?

🔔क्या जानबूझकर किसी विशेष लाभ के लिए नियमों की अनदेखी की जा रही है?

🔔स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी तैनाती से विभागीय पारदर्शिता पूरी तरह प्रभावित हो रही है।

💫उठ रही है जांच की मांग

स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों में इस बात को लेकर खासा रोष है। चर्चा आम है कि जब रक्षक ही नियम तोड़ने वालों की कतार में खड़ा हो, तो व्यवस्था कैसे सुधरेगी? मामले की गंभीरता को देखते हुए अब विभागीय आलाकमान से स्पष्टीकरण और उचित कार्रवाई की मांग की जा रही है।

🔥बड़ा सवाल: क्या बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर योगेंद्र चौहान का स्थानांतरण करेंगे, या ‘ऊपर’ तक पहुंच के चलते नियमों की यूं ही बलि चढ़ती रहेगी?

Back to top button
error: Content is protected !!